Sunday, April 26, 2026

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उदेंगा में धूम धाम से मनाया गया लोक पारम्परिक त्यौहार अक्ति तिहार

कमलेश कुमार मरकाम की रिपोर्ट

माकड़ी/उदेंगा ~ कोंडागांव जिले अंतर्गत माकड़ी ब्लॉक के ग्राम उदेंगा सहित पूरे बस्तर अंचल में ‘अक्ति तिहार’ (अक्षय तृतीया) का पर्व 20 अप्रैल सोमवार को पारंपरिक उत्साह और धूमधाम से मनाया गया। यह पर्व कृषि और छत्तीसगढ़ बस्तर की संस्कृति का अनूठा संगम है,गांव के सक्रीय युवा अनंत जैन ने अक्ति तिहार के संबध में जानकारी साझा करते बताया कि अक्ति तिहार (अक्षय तृतीया) के दिन माटी पूजन के साथ खेती-किसानी के नए सत्र की शुरुआत की जाती है। किसान कोठी (धान भंडारण) से बीज

निकालकर पूजा करते हैं और खेतों में बुवाई की सांकेतिक शुरुआत करते हैं। मान्यता है कि इस दिन की गई पूजा से फसल अच्छी होती है। छत्तीसगढ़ के गांव-गांव में अक्ति के दिन धरती माता की पूजा की जाती है, इस दिन घरों में बच्चे मिट्टी के बने पुतरा-पुतरी (गुड्डा-गुड़िया) की शादी रचाते हैं। पारंपरिक विवाह रस्मों की तरह हल्दी, बारात, फेरे और गीत-संगीत के साथ गुड्डा-गुड़िया का ब्याह किया जाता है। अक्ति के दिन पर्रा, सूपा, टोकनी, और शादी-ब्याह से जुड़ी सामग्री की खरीदारी की जाती है। इस दिन सोना-चांदी खरीदना भी बेहद शुभ माना जाता है।अक्ति तिहार के अवसर पर ग्रामीणो में उत्साह का माहौल रहा और लोगों ने अच्छी फसल व सुख-समृद्धि की कामना की।इस दौरान लखुराम जैन, जयलाल जैन, तुलसी नेगी, रूपसिंह जैन, देवनाथ सूर्यवंशी, पुरषोत्तम जैन, इंदल पाण्डे, रामसिंह शोरी, पांचिया जैन एवं गांव के युवा साथी व बच्चे उपस्थित रहे

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उदेंगा में धूम धाम से मनाया गया लोक पारम्परिक त्यौहार अक्ति तिहार

कमलेश कुमार मरकाम की रिपोर्ट

माकड़ी/उदेंगा ~ कोंडागांव जिले अंतर्गत माकड़ी ब्लॉक के ग्राम उदेंगा सहित पूरे बस्तर अंचल में ‘अक्ति तिहार’ (अक्षय तृतीया) का पर्व 20 अप्रैल सोमवार को पारंपरिक उत्साह और धूमधाम से मनाया गया। यह पर्व कृषि और छत्तीसगढ़ बस्तर की संस्कृति का अनूठा संगम है,गांव के सक्रीय युवा अनंत जैन ने अक्ति तिहार के संबध में जानकारी साझा करते बताया कि अक्ति तिहार (अक्षय तृतीया) के दिन माटी पूजन के साथ खेती-किसानी के नए सत्र की शुरुआत की जाती है। किसान कोठी (धान भंडारण) से बीज

निकालकर पूजा करते हैं और खेतों में बुवाई की सांकेतिक शुरुआत करते हैं। मान्यता है कि इस दिन की गई पूजा से फसल अच्छी होती है। छत्तीसगढ़ के गांव-गांव में अक्ति के दिन धरती माता की पूजा की जाती है, इस दिन घरों में बच्चे मिट्टी के बने पुतरा-पुतरी (गुड्डा-गुड़िया) की शादी रचाते हैं। पारंपरिक विवाह रस्मों की तरह हल्दी, बारात, फेरे और गीत-संगीत के साथ गुड्डा-गुड़िया का ब्याह किया जाता है। अक्ति के दिन पर्रा, सूपा, टोकनी, और शादी-ब्याह से जुड़ी सामग्री की खरीदारी की जाती है। इस दिन सोना-चांदी खरीदना भी बेहद शुभ माना जाता है।अक्ति तिहार के अवसर पर ग्रामीणो में उत्साह का माहौल रहा और लोगों ने अच्छी फसल व सुख-समृद्धि की कामना की।इस दौरान लखुराम जैन, जयलाल जैन, तुलसी नेगी, रूपसिंह जैन, देवनाथ सूर्यवंशी, पुरषोत्तम जैन, इंदल पाण्डे, रामसिंह शोरी, पांचिया जैन एवं गांव के युवा साथी व बच्चे उपस्थित रहे

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