कमलेश कुमार मरकाम की रिपोर्ट
बड़ेराजपुर/बालेंगा ~ कोंडागांव जिले के विकासखण्ड बड़ेराजपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत बालेंगा स्थित बुढ़ादेव कोट में दो दिवसीय करसाड़ सात पाली प्राण प्रतिष्ठा का आयोजन शुक्रवार 24 अप्रैल को किया गया जिसमें शनिवार को देवी देवताओं को विदाई के साथ समापन हुआ जिसमें पारंपरिक रीति रिवाजों से मनाया गया करसाड़ एवं सात पाली गांवों से पहुंचे श्रद्धालु बालेंगा बना मुख्य करसाड़ क्षेत्र में आयोजित पारंपरिक करसाड़ कार्यक्रम में इस वर्ष मुख्य गांव के रूप में बालेंगा की महत्वपूर्ण भूमिका रही। बालेंगा के साथ माकड़ी, कांवरा भतवा, लिहागांव , राहटीपारा पातरीपारा घोटगांव आमगांव गहरिनबंध सहित कांकेर और धमतरी जिले के भी देवी देवताओं का आना शिलशिला शुरू

हुआ सात पाली से बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपने-अपने देवी-देवताओं के साथ शामिल हुए।कार्यक्रम की शुरुआत बालेंगा सहित सभी सात पाली के देवी-देवताओं के आगमन और विधि-विधान से सेवा-पूजा के साथ हुई। इसके बाद ग्रामीणों ने एक साथ बैठक कर अपने पूर्वजों की परंपरा को निभाते हुए दादा-परदादा के नाम, गांव और कुल की जानकारी साझा कीसेवा-पूजा के उपरांत सभी श्रद्धालुओं द्वारा सामूहिक रूप से भोजन ग्रहण किया गया, जिसके बाद भव्य मांदरी बाजा के साथ पारंपरिक नृत्य का आयोजन हुआ। इस दौरान पूरे क्षेत्र में उत्साह और उल्लास का माहौल देखने को मिला।यह परंपरा न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि सामाजिक एकता और अपनी जड़ों से जुड़े रहने का भी सशक्त माध्यम मानी जाती है।दूसरे दिन सभी देवी-देवताओं को पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ विदाई दी गई, जिसके साथ यह आयोजन संपन्न हुआ।ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से चली आ रही यह परंपरा आज भी समाज को एकजुट रखने और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने में अहम भूमिका निभा रही है। जिसमें प्रमुख रूप से मौजूद रहे माता पुजारी, गायता, पटेल, गवटिया , सरपंच, समिति के अध्यक्ष उपाध्यक्ष कोषाध्यक्ष सचिव और बड़ी संख्या में ग्रामवासी मौजूद रहे



