आदिवासी पहचान बनाए रखना जरूरी: संतराम नेताम।
कमलेश कुमार मरकाम की रिपोर्ट
केशकाल/तोसकापाल ~ पूर्व विधायक संतराम नेताम का आमजन के साथ डांस करने और घुलने-मिलने का सिलसिला जारी है। ग्राम तोसकापाल में शादी समारोह में शिरकत करने पहुंचे पूर्व विधायक संतराम नेताम मांदर की थाप पर वह आदिवासियों के साथ जमकर थिरके। हालांकि पूर्व विधायक नेताम इससे पहले भी डांस करते कई वीडियो वायरल हुए हैं, खासकर छत्तीसगढ़ी गीतों पर.. तोसकापाल (केशकाल) से एक रोचक वीडियो सामने आया है, जहाँ पूर्व विधायक संतराम नेताम आदिवासियों के पारंपरिक वेशभूषा के साथ मांदरी नृत्य की धुन पर झूमते हुए नजर आए। एक कार्यक्रम के दौरान मुरिया

जनजाति के पारंपरिक नृत्य के साथ अतिथियों का स्वागत किया गया, जहाँ पूर्व विधायक ने कलाकारों के साथ कदम से कदम मिलाकर मांदरी नृत्य किए।**ग्रामीणों से लेकर खुद के गले में लटकाई मांदर, फिर बजाते हुए थिरके- दरअसल पूर्व विधायक विधायक गुलाब संतराम नेताम सोमवार को क्षेत्र के दौरे के दौरान केशकाल विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम तोसकापाल में एक शादी समारोह में शिरकत करने पहुंचे थे। वहां पर विधायक के स्वागत में ग्रामीण मांदर की थाप पर थिरक ही रहे थे तभी पूर्व विधायक भी ग्रामीणों के बीच पहुंच गए और मांदर मांगकर अपने गले में

लटका ली। इसके बाद मांदर बजाते हुए उन्होंने थिरकना शुरू कर दिया। पूर्व विधायक काफी देर तक मांदर बजाते हुए थिरकते रहे। संतराम नेताम के डांस के वीडियो इससे पहले भी कई बार सोशल मीडिया में वायरल हुए हैं। संतराम नेताम जब किसी भी आयोजन में शरीक होते हैं। वहां अगर छत्तीसगढ़ी गीत बजता है या फिर पारंपरिक वाद्य यंत्र तो वे खुद को रोक नहीं पाते और जमकर थिरकते हैं। पूर्व विधायक का यह अंदाज लोगों को खूब भाता भी है। उसके बाद अब फिर उनका वीडियो और डांस सुर्खियों में है। पूर्व विधायक इस नृत्य के माध्यम से आदिवासी संस्कृति के प्रति अपना जुड़ाव और उत्साह दिखाते नजर आए। पूर्व विधायक का यह देसी अंदाज सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।**मांदरी नृत्य बस्तर की धड़कन व परंपरा की पहचान।* *संतराम नेताम ने कहा की मांदरी नृत्य छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में मुरिया और गोंड जनजाति की समृद्ध आदिवासी परंपरा का एक महत्वपूर्ण और जीवंत हिस्सा है। यह नृत्य विशेष रूप से घोटुल संस्था से जुड़ा है। यह नृत्य न केवल मनोरंजन का साधन है, बल्कि आदिवासी युवाओं (लया लयोर) के लिए सामाजिक और सांस्कृतिक शिक्षा का एक माध्यम भी है। आदिवासी समाज के लोगों को परंपरा के अनुसार एक साथ मिलकर चलना चाहिए। आदिवासी समाज के लोग आज भी अपनी पुरानी परंपरा पर कायम है। यही कारण है कि आदिवासी समाज आगे बढ़ रहा है।



