Wednesday, April 15, 2026

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पूर्व विधायक संतराम नेताम का अनोखा जनसम्पर्क गांव-गांव में गुजार रहे रात।

कमलेश कुमार मरकाम की रिपोर्ट

आगामी चुनाव से पहले लोगों की नब्ज़ टटोलने की कवायद।

केशकाल/ केशकाल विधानसभा के पूर्व विधायक संतराम नेताम इन दिनों अपने जनसम्पर्क अभियान के तहत केशकाल विकासखंड के विभिन्न गावों में जनसम्पर्क कर लोगों के बीच रहे हैं। यह एक अनोखी पहल है जिसमें वें सिर्फ दिन में ही नहीं बल्कि रात में भी ग्रामीणों के साथ रहकर उनकी समस्याओं और भावनाओं को करीब से समझ रहे हैं। नेताम का यहां जनसंपर्क अभियान आगामी चुनाव की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि चुनाव में अभी लगभग ढाई साल बाकी है। इस दौरान वह न केवल लोगों से मिल रहे हैं, बल्कि उनकी रोजमर्रा और ज़िन्दगी का हिस्सा बनकर उनके दुख दर्द को भी जान रहे हैं। गांव में रात्रि विश्राम करके वे ग्रामीणों के साथ खुलकर बात करते हैं और उनकी समस्याओं को सुनते हैं। हाल ही में हुए उनके प्रावस के दौरान, ग्रामीणों ने भाजपा सरकार के प्रति अपनी नाराजगी

व्यक्ति की। विशेषकर किसान और बेरोजगार युवा वर्ग में निराशा साफ देखी जा सकती है। नेताम इन समस्याओं को गंभीरता से सुन रहे हैं और लोगों को आश्वासन कर रहे हैं। इस जनसंपर्क के दौरान नेताम गावों में आयोजित होने वाले विवाह कार्यक्रमों में भी हिस्सा ले रहे हैं। इसके साथ में क्षेत्र में हो रहे निर्माण कार्यों का भी जायजा ले रहे है। अपने इस दो दिवसीय प्रवास के दौरान संतराम नेताम ग्राम इरागांव, डुंडाबेड़मा,तोड़ाषी,बेलगांव, सुखबेड़ा,धनोरा,हिचका, बनियागांव,भाटगांव सहित विभिन्न गावों में जनसम्पर्क कर अपने कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर उनका हाल-चाल जान रहे हैं। यहां रणनीति कार्यकर्ताओं को प्रेरित करने और संगठन को मजबूत करने में भी सहायक सिद्ध हो रही है। संतराम नेताम का यह गांव-गांव रात बिताने का तरीका लोगों के बीच उनकी पकड़ को और मजबूत कर रहा है,और यह आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारीयों की एक महत्वपूर्ण कड़ी मानी जा रही है।* *जनसंपर्क के दौरान धनोरा के वार्षिक मेले में शामिल हुए पूर्व विधायक :**केशकाल विकासखंड क्षेत्र अंतर्गत ग्राम धनोरा के वार्षिक मेले में पूर्व विधायक संतराम नेताम अपने कार्यकर्ताओं के साथ शिरकत किए। लोगों से मिलकर उनका हाल-चाल जाना तथा ग्रामवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मेला मड़ई हमारे बस्तर की परंपरा और संस्कृति की पहचान है। यह अवसर अपनों से मिलने और संपर्क का माध्यम होता है। युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति को जानने समझने का मौका मिलता है।

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पूर्व विधायक संतराम नेताम का अनोखा जनसम्पर्क गांव-गांव में गुजार रहे रात।

कमलेश कुमार मरकाम की रिपोर्ट

आगामी चुनाव से पहले लोगों की नब्ज़ टटोलने की कवायद।

केशकाल/ केशकाल विधानसभा के पूर्व विधायक संतराम नेताम इन दिनों अपने जनसम्पर्क अभियान के तहत केशकाल विकासखंड के विभिन्न गावों में जनसम्पर्क कर लोगों के बीच रहे हैं। यह एक अनोखी पहल है जिसमें वें सिर्फ दिन में ही नहीं बल्कि रात में भी ग्रामीणों के साथ रहकर उनकी समस्याओं और भावनाओं को करीब से समझ रहे हैं। नेताम का यहां जनसंपर्क अभियान आगामी चुनाव की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि चुनाव में अभी लगभग ढाई साल बाकी है। इस दौरान वह न केवल लोगों से मिल रहे हैं, बल्कि उनकी रोजमर्रा और ज़िन्दगी का हिस्सा बनकर उनके दुख दर्द को भी जान रहे हैं। गांव में रात्रि विश्राम करके वे ग्रामीणों के साथ खुलकर बात करते हैं और उनकी समस्याओं को सुनते हैं। हाल ही में हुए उनके प्रावस के दौरान, ग्रामीणों ने भाजपा सरकार के प्रति अपनी नाराजगी

व्यक्ति की। विशेषकर किसान और बेरोजगार युवा वर्ग में निराशा साफ देखी जा सकती है। नेताम इन समस्याओं को गंभीरता से सुन रहे हैं और लोगों को आश्वासन कर रहे हैं। इस जनसंपर्क के दौरान नेताम गावों में आयोजित होने वाले विवाह कार्यक्रमों में भी हिस्सा ले रहे हैं। इसके साथ में क्षेत्र में हो रहे निर्माण कार्यों का भी जायजा ले रहे है। अपने इस दो दिवसीय प्रवास के दौरान संतराम नेताम ग्राम इरागांव, डुंडाबेड़मा,तोड़ाषी,बेलगांव, सुखबेड़ा,धनोरा,हिचका, बनियागांव,भाटगांव सहित विभिन्न गावों में जनसम्पर्क कर अपने कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर उनका हाल-चाल जान रहे हैं। यहां रणनीति कार्यकर्ताओं को प्रेरित करने और संगठन को मजबूत करने में भी सहायक सिद्ध हो रही है। संतराम नेताम का यह गांव-गांव रात बिताने का तरीका लोगों के बीच उनकी पकड़ को और मजबूत कर रहा है,और यह आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारीयों की एक महत्वपूर्ण कड़ी मानी जा रही है।* *जनसंपर्क के दौरान धनोरा के वार्षिक मेले में शामिल हुए पूर्व विधायक :**केशकाल विकासखंड क्षेत्र अंतर्गत ग्राम धनोरा के वार्षिक मेले में पूर्व विधायक संतराम नेताम अपने कार्यकर्ताओं के साथ शिरकत किए। लोगों से मिलकर उनका हाल-चाल जाना तथा ग्रामवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मेला मड़ई हमारे बस्तर की परंपरा और संस्कृति की पहचान है। यह अवसर अपनों से मिलने और संपर्क का माध्यम होता है। युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति को जानने समझने का मौका मिलता है।

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