Friday, March 13, 2026

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**वन विभाग की लापरवाही से जंगलों में लगी आग, पर्यावरण को भारी नुकसान*जिले के फरसगांव विकासखण्ड अंतर्गत बड़ेडोंगर वन उपपरिक्षेत्र के पावड़ा और मड़कड़ा के जंगलों में आग लगने से पर्यावरण संपदा हो रही नष्ट।

आनिंदलाल यादव कि रिपोर्ट

कोंडागांव

कोंडागांव जिले के फरसगांव विकासखण्ड क्षेत्र के वन उपपरिक्षेत्र बड़ेडोंगर अंतर्गत ग्राम पंचायत पावड़ा और मड़कड़ा के जंगलों में आग लगने की घटना सामने आई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि वन विभाग के कर्मचारियों की अनदेखी और गैर-जिम्मेदाराना रवैये के कारण जंगलों में बार-बार आग लगने की घटनाएँ हो रही हैं, जिससे पर्यावरण को भारी क्षति पहुँच रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग के कुछ कर्मचारी अपने कर्तव्यों के प्रति गंभीर नहीं हैं और समय पर निगरानी तथा रोकथाम के उपाय नहीं किए जाते। इसके कारण जंगलों में आग फैलती है और बड़ी मात्रा में वन संपदा, जड़ी-बूटियाँ तथा प्राकृतिक संसाधन नष्ट हो जाते हैं।

स्थानीय लोगों ने यह भी कहा कि यदि जंगलों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए जिम्मेदार कर्मचारी अपनी जिम्मेदारी का सही ढंग से निर्वहन करें, तो ऐसी घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है। वन विभाग के अधिकारियों से इस मामले में गंभीरता से जांच करने और लापरवाह कर्मचारियों पर कार्रवाई करने की मांग की गई है।

ग्रामीणों का कहना है कि जंगल पर्यावरण संतुलन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। जंगलों में लगने वाली आग से न केवल पेड़-पौधे नष्ट होते हैं, बल्कि अनेक प्रकार के वन्य जीव-जंतु और औषधीय पौधे भी प्रभावित होते हैं। इससे प्राकृतिक संसाधनों के साथ-साथ ग्रामीणों की आजीविका पर भी असर पड़ता है।इसलिए स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि जंगलों में आग लगने की घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएँ तथा वन क्षेत्र की सुरक्षा और संरक्षण सुनिश्चित किया जाए, ताकि पर्यावरण और वन संपदा को बचाया जा सके।

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**वन विभाग की लापरवाही से जंगलों में लगी आग, पर्यावरण को भारी नुकसान*जिले के फरसगांव विकासखण्ड अंतर्गत बड़ेडोंगर वन उपपरिक्षेत्र के पावड़ा और मड़कड़ा के जंगलों में आग लगने से पर्यावरण संपदा हो रही नष्ट।

आनिंदलाल यादव कि रिपोर्ट

कोंडागांव

कोंडागांव जिले के फरसगांव विकासखण्ड क्षेत्र के वन उपपरिक्षेत्र बड़ेडोंगर अंतर्गत ग्राम पंचायत पावड़ा और मड़कड़ा के जंगलों में आग लगने की घटना सामने आई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि वन विभाग के कर्मचारियों की अनदेखी और गैर-जिम्मेदाराना रवैये के कारण जंगलों में बार-बार आग लगने की घटनाएँ हो रही हैं, जिससे पर्यावरण को भारी क्षति पहुँच रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग के कुछ कर्मचारी अपने कर्तव्यों के प्रति गंभीर नहीं हैं और समय पर निगरानी तथा रोकथाम के उपाय नहीं किए जाते। इसके कारण जंगलों में आग फैलती है और बड़ी मात्रा में वन संपदा, जड़ी-बूटियाँ तथा प्राकृतिक संसाधन नष्ट हो जाते हैं।

स्थानीय लोगों ने यह भी कहा कि यदि जंगलों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए जिम्मेदार कर्मचारी अपनी जिम्मेदारी का सही ढंग से निर्वहन करें, तो ऐसी घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है। वन विभाग के अधिकारियों से इस मामले में गंभीरता से जांच करने और लापरवाह कर्मचारियों पर कार्रवाई करने की मांग की गई है।

ग्रामीणों का कहना है कि जंगल पर्यावरण संतुलन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। जंगलों में लगने वाली आग से न केवल पेड़-पौधे नष्ट होते हैं, बल्कि अनेक प्रकार के वन्य जीव-जंतु और औषधीय पौधे भी प्रभावित होते हैं। इससे प्राकृतिक संसाधनों के साथ-साथ ग्रामीणों की आजीविका पर भी असर पड़ता है।इसलिए स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि जंगलों में आग लगने की घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएँ तथा वन क्षेत्र की सुरक्षा और संरक्षण सुनिश्चित किया जाए, ताकि पर्यावरण और वन संपदा को बचाया जा सके।

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