फरसगांव।
फरसगांव विकासखंड के ग्राम पाटला में “संस्कृति और शिक्षा संवाद” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम आदिवासी युवा संगठन पाटला के तत्वावधान में आयोजित हुआ, जिसमें आदिवासी युवा छात्र संगठन (AYSU) बस्तर संभाग एवं जिला कोंडागांव के सदस्य बड़ी संख्या में शामिल हुए।
यह पहली बार था जब क्षेत्र में इस प्रकार का कार्यक्रम हुआ, जिसमें छात्र संगठन के सदस्यों ने शिक्षा और संस्कृति से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम में जशपुर से आए निर्मल नेताम, जो वर्तमान में Ph.D. कर रहे हैं, ने उच्च शिक्षा पर महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने कहा कि —
“पुराने समय के लोगों और आज की शिक्षित युवा पीढ़ी में बड़ा अंतर है। गाँव के बच्चों और शहर के बच्चों में शिक्षा का स्तर अलग है, जिसका मुख्य कारण है — शहरों में बच्चों को पढ़ाई का माहौल और अभिभावकों का सहयोग मिलना।”
डॉ. नेताम ने देश के प्रमुख विश्वविद्यालयों जैसे जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU), गुरु घासीदास विश्वविद्यालय (GGU), असम विश्वविद्यालय और नालंदा विश्वविद्यालय के बारे में बताया, जहाँ उच्च शिक्षा के अवसर उपलब्ध हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों को स्कॉलरशिप (छात्रवृत्ति) और फेलोशिप के बीच अंतर भी समझाया।
उन्होंने बताया कि —
“स्कॉलरशिप केवल पढ़ाई के खर्च के लिए होती है, जबकि फेलोशिप में पढ़ाई के साथ-साथ रहने, खाने और पारिवारिक खर्च के लिए भी आर्थिक सहायता दी जाती है।”
डॉ. नेताम ने कहा कि भारत सरकार और राज्य सरकार द्वारा अनेक योजनाएँ चलाई जाती हैं, लेकिन जानकारी के अभाव में ग्रामीण छात्र उनका लाभ नहीं ले पाते।
उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे नए संस्थानों और अवसरों की जानकारी प्राप्त करें और उच्च शिक्षा के प्रति जागरूक बनें।
कार्यक्रम के अंत में वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा केवल भाषा का माध्यम नहीं है —
“ज्ञान किसी भी भाषा में प्राप्त किया जा सकता है; हिन्दी और अंग्रेज़ी केवल माध्यम हैं, पर असली मूल्य ज्ञान का होता है।”
कार्यक्रम में गाँव के बच्चे, युवा, अभिभावक और बुजुर्ग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
इस आयोजन को लेकर क्षेत्र में उत्साह और नई सोच का माहौल देखने को मिला।




