Saturday, February 14, 2026

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ग्राम पंचायत उदेंगा में जैविक खेती अंतर्गत किसान संगोष्ठी कार्यक्रम का आयोजन किया गया

कमलेश कुमार मरकाम की रिपोर्ट

फरसगांव/माकड़ी ~ कोंड़ागांव जिले के विकासखण्ड माकड़ी अंतर्गत ग्राम पंचायत उदेंगा में बीते दिनों किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग के एक्सटेंशन रिफार्म आत्मा योजना अंतर्गत ग्राम उदेंगा (विकासखंड माकड़ी) में खरीफ वर्ष 2025-26 के किसान संगोष्ठी का आयोजन किया गया।संगोष्ठी में कृषि विज्ञान केंद्र बोरगांव (कोंडागांव) से आए विज्ञानी डा. भूपेंद्र ठाकुर ने किसानों को उन्नत कृषि तकनीक, फसल प्रबंधन, बीज उपचार और जैविक खेती में जीवामृत व बीजामृत के उपयोग की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती अपनाने से न केवल मिट्टी की उर्वरक शक्ति बढ़ती है, बल्कि उत्पादन की गुणवत्ता भी सुधरती है। उन्होंने किसानों को हरी खाद, फसल चक्र और कंपोस्ट व केंचुआ खाद के उपयोग पर जोर दिया। वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी मीना नेताम ने किसानों को विभागीय योजनाओं और जैविक खेती के लाभ के बारे में विस्तार से बताया। वहीं उद्यानिकी विभाग से अमरचंद ध्रुव ने पाम आयल खेती और संबंधित योजनाओं की जानकारी दी। पशुपालन विभाग के सुधरन मरकाम ने पशुधन आधारित आजीविका और योजनाओं की जानकारी साझा की। कार्यक्रम के आयोजन में ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी तुलसीराम नेताम, बीटीएम भूपेंद्र कुमार सिन्हा और एटीएम हर्षलता पद्माकर की विशेष भूमिका रही। ग्राम पंचायत सरपंच सोनाराम शोरी, जनपद सदस्य अनीता मरकाम, और बड़ी संख्या में प्रगतिशील किसान उपस्थित रहे। संगोष्ठी का उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक व जैविक खेती के प्रति प्रेरित करना और उन्हें आत्मनिर्भर कृषि की दिशा में अग्रसर करना था।

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ग्राम पंचायत उदेंगा में जैविक खेती अंतर्गत किसान संगोष्ठी कार्यक्रम का आयोजन किया गया

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फरसगांव/माकड़ी ~ कोंड़ागांव जिले के विकासखण्ड माकड़ी अंतर्गत ग्राम पंचायत उदेंगा में बीते दिनों किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग के एक्सटेंशन रिफार्म आत्मा योजना अंतर्गत ग्राम उदेंगा (विकासखंड माकड़ी) में खरीफ वर्ष 2025-26 के किसान संगोष्ठी का आयोजन किया गया।संगोष्ठी में कृषि विज्ञान केंद्र बोरगांव (कोंडागांव) से आए विज्ञानी डा. भूपेंद्र ठाकुर ने किसानों को उन्नत कृषि तकनीक, फसल प्रबंधन, बीज उपचार और जैविक खेती में जीवामृत व बीजामृत के उपयोग की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती अपनाने से न केवल मिट्टी की उर्वरक शक्ति बढ़ती है, बल्कि उत्पादन की गुणवत्ता भी सुधरती है। उन्होंने किसानों को हरी खाद, फसल चक्र और कंपोस्ट व केंचुआ खाद के उपयोग पर जोर दिया। वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी मीना नेताम ने किसानों को विभागीय योजनाओं और जैविक खेती के लाभ के बारे में विस्तार से बताया। वहीं उद्यानिकी विभाग से अमरचंद ध्रुव ने पाम आयल खेती और संबंधित योजनाओं की जानकारी दी। पशुपालन विभाग के सुधरन मरकाम ने पशुधन आधारित आजीविका और योजनाओं की जानकारी साझा की। कार्यक्रम के आयोजन में ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी तुलसीराम नेताम, बीटीएम भूपेंद्र कुमार सिन्हा और एटीएम हर्षलता पद्माकर की विशेष भूमिका रही। ग्राम पंचायत सरपंच सोनाराम शोरी, जनपद सदस्य अनीता मरकाम, और बड़ी संख्या में प्रगतिशील किसान उपस्थित रहे। संगोष्ठी का उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक व जैविक खेती के प्रति प्रेरित करना और उन्हें आत्मनिर्भर कृषि की दिशा में अग्रसर करना था।

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