Friday, February 13, 2026

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सोनपुर माइक्रो वॉटरशेड महोत्सव में उमड़ा जन सैलाब, भूमि –जल संरक्षण का दिया संदेश

कमलेश कुमार मरकाम की रिपोर्ट

हरवेल/बड़ेराजपुर 12 दिसंबर 2025, शुक्रवार। राज्य शासन और जिला प्रशासन के निर्देशानुसार कोंडागांव जिले के सोनपुर माइक्रो वॉटरशेड में शुक्रवार को परियोजना स्तरीय वॉटरशेड महोत्सव का आयोजन बड़े उत्साह और जन-सहभागिता के साथ किया गया। महोत्सव का उद्देश्य भूमि एवं जल संरक्षण के महत्व को जन-जन तक पहुंचाना था।वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में आयोजन*यह कार्यक्रम माननीय कलेक्टर श्रीमती नुपुर राशि पन्ना के निर्देशन में तथा परियोजना प्रबंधक सह उप संचालक कृषि, डी.पी. टांडे के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। परियोजना अधिकारी सी.एस. कश्यप ने

आयोजन का सफल नेतृत्व किया।कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक रूप से गायता श्री लालूराम मंडावी एवं पुजारी श्री सुदामा मंडावी द्वारा छत्तीसगढ़ महतारी के समक्ष दीप प्रज्वलन से किया गया। इस अवसर पर ग्राम के वरिष्ठ सदस्य और अनेक गणमान्य नागरिक मंचासीन रहे, जिनमें अध्यक्ष श्री रूपसिंह मरकाम, पिलादाऊ नेताम, श्रीमती साधना मंडावी और दीपक नेताम प्रमुख थे।*सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और प्रतियोगिताओं ने बांधा समां*महोत्सव के दौरान विभिन्न सांस्कृतिक और खेल गतिविधियों का आयोजन किया गया। स्कूली बच्चों के लिए निबंध लेखन, चित्रकला और रंगोली प्रतियोगिताओं ने उनकी रचनात्मकता को मंच दिया। वहीं, माध्यमिक और प्राथमिक विद्यालयों के बच्चों ने मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर ग्रामीणों का दिल जीत लिया।ग्रामीणों की सहभागिता बढ़ाने के लिए महिला एवं पुरुषों के लिए कुर्सी दौड़ और रस्सा खींच जैसी प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया गया, जिसने कार्यक्रम को और अधिक रोचक बना दिया।संरक्षण और आजीविका पर ज़ोरस्वागत भाषण में परियोजना अधिकारी श्री सी.एस. कश्यप ने वॉटरशेड परियोजना के उद्देश्यों और भूमि-जल संरक्षण के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने परियोजना की उपलब्धियों को भी साझा किया।सचिव श्री पुनीत नेताम ने स्व-सहायता समूहों के माध्यम से आजीविका संवर्धन की संभावनाओं पर महत्वपूर्ण जानकारी दी, जबकि श्री नवरतन सेठिया एवं श्री होमीन साहू ने निर्मित संरचनाओं के संरक्षण एवं रख-रखाव पर उपयोगी सुझाव दिए।कार्यक्रम को सफल बनाने में तीनों विद्यालयों के शिक्षकों, ग्रामीणजनों और स्व-सहायता समूह की महिलाओं का उल्लेखनीय योगदान रहा।

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सोनपुर माइक्रो वॉटरशेड महोत्सव में उमड़ा जन सैलाब, भूमि –जल संरक्षण का दिया संदेश

कमलेश कुमार मरकाम की रिपोर्ट

हरवेल/बड़ेराजपुर 12 दिसंबर 2025, शुक्रवार। राज्य शासन और जिला प्रशासन के निर्देशानुसार कोंडागांव जिले के सोनपुर माइक्रो वॉटरशेड में शुक्रवार को परियोजना स्तरीय वॉटरशेड महोत्सव का आयोजन बड़े उत्साह और जन-सहभागिता के साथ किया गया। महोत्सव का उद्देश्य भूमि एवं जल संरक्षण के महत्व को जन-जन तक पहुंचाना था।वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में आयोजन*यह कार्यक्रम माननीय कलेक्टर श्रीमती नुपुर राशि पन्ना के निर्देशन में तथा परियोजना प्रबंधक सह उप संचालक कृषि, डी.पी. टांडे के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। परियोजना अधिकारी सी.एस. कश्यप ने

आयोजन का सफल नेतृत्व किया।कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक रूप से गायता श्री लालूराम मंडावी एवं पुजारी श्री सुदामा मंडावी द्वारा छत्तीसगढ़ महतारी के समक्ष दीप प्रज्वलन से किया गया। इस अवसर पर ग्राम के वरिष्ठ सदस्य और अनेक गणमान्य नागरिक मंचासीन रहे, जिनमें अध्यक्ष श्री रूपसिंह मरकाम, पिलादाऊ नेताम, श्रीमती साधना मंडावी और दीपक नेताम प्रमुख थे।*सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और प्रतियोगिताओं ने बांधा समां*महोत्सव के दौरान विभिन्न सांस्कृतिक और खेल गतिविधियों का आयोजन किया गया। स्कूली बच्चों के लिए निबंध लेखन, चित्रकला और रंगोली प्रतियोगिताओं ने उनकी रचनात्मकता को मंच दिया। वहीं, माध्यमिक और प्राथमिक विद्यालयों के बच्चों ने मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर ग्रामीणों का दिल जीत लिया।ग्रामीणों की सहभागिता बढ़ाने के लिए महिला एवं पुरुषों के लिए कुर्सी दौड़ और रस्सा खींच जैसी प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया गया, जिसने कार्यक्रम को और अधिक रोचक बना दिया।संरक्षण और आजीविका पर ज़ोरस्वागत भाषण में परियोजना अधिकारी श्री सी.एस. कश्यप ने वॉटरशेड परियोजना के उद्देश्यों और भूमि-जल संरक्षण के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने परियोजना की उपलब्धियों को भी साझा किया।सचिव श्री पुनीत नेताम ने स्व-सहायता समूहों के माध्यम से आजीविका संवर्धन की संभावनाओं पर महत्वपूर्ण जानकारी दी, जबकि श्री नवरतन सेठिया एवं श्री होमीन साहू ने निर्मित संरचनाओं के संरक्षण एवं रख-रखाव पर उपयोगी सुझाव दिए।कार्यक्रम को सफल बनाने में तीनों विद्यालयों के शिक्षकों, ग्रामीणजनों और स्व-सहायता समूह की महिलाओं का उल्लेखनीय योगदान रहा।

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