Friday, February 13, 2026

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धान खरीदी केंद्र हरवेल में किसानों के द्वारा किया गया श्रमदान

कमलेश कुमार मरकाम कि रिपोर्ट

विश्रामपुरी/हरवेल ~ कोंडागांव जिले के विकासखण्ड बड़ेराजपुर क्षेत्रों में इन दिनों धान खरीदी जोर शोर के साथ शुरू कर दिया गया है लेकिन कहीं कहीं पर धीमी गति से चल रहा है हरवेल धान खरीदी केंद्र में 21 नवंबर शुक्रवार को किसानों के द्वारा श्रमदान किया गया खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के तहत शासन द्वारा निर्धारित किया गया था हाल ही में, छत्तीसगढ़ के कई धान खरीदी केंद्रों पर कर्मचारियों की हड़ताल के कारण उत्पन्न अव्यवस्था से निपटने के लिए किसानों ने स्वयं व्यवस्था संभाली और श्रमदान किया। श्रमदान के कारण कर्मचारी हड़ताल: प्राथमिक कारण यह था कि धान खरीदी केंद्रों के कर्मचारी (जैसे लैंप्स कर्मचारी और कंप्यूटर ऑपरेटर) अपनी विभिन्न मांगों को लेकर हड़ताल पर थे, जिससे खरीदी प्रक्रिया पूरी तरह ठप हो गई थी।अव्यवस्था: सरकारी व्यवस्था ठप होने के कारण, केंद्रों पर धान बेचने आए किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था, जिससे लंबी कतारें लग गईं और काम रुका रहा।समय की कमी: किसान जल्द से जल्द अपना धान बेचना चाहते थे, क्योंकि खरीदी का समय सीमित होता है। किसानों द्वारा किए गए कार्य (श्रमदान)किसानों ने अपनी समस्याओं को हल करने और धान खरीदी प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए खुद ही कार्य करने में व्यस्त हो गए किए जिसको लेकर ग्राम पंचायत हरवेल सरपंच महेश नेताम ने बताया कि 15 नवम्बर से शुरू हुई धान खरीदी लेकिन लेमप्स के कर्मचारी और आपरेटर हड़ताल में चले जानेके कारण किसानों को मायुस होकर जाना पड़ रहा है और किसानों ने स्वयं श्रमदान किया और ऐसा ही गम्हरी, बासकोट में भी देखने को मिला है|

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धान खरीदी केंद्र हरवेल में किसानों के द्वारा किया गया श्रमदान

कमलेश कुमार मरकाम कि रिपोर्ट

विश्रामपुरी/हरवेल ~ कोंडागांव जिले के विकासखण्ड बड़ेराजपुर क्षेत्रों में इन दिनों धान खरीदी जोर शोर के साथ शुरू कर दिया गया है लेकिन कहीं कहीं पर धीमी गति से चल रहा है हरवेल धान खरीदी केंद्र में 21 नवंबर शुक्रवार को किसानों के द्वारा श्रमदान किया गया खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के तहत शासन द्वारा निर्धारित किया गया था हाल ही में, छत्तीसगढ़ के कई धान खरीदी केंद्रों पर कर्मचारियों की हड़ताल के कारण उत्पन्न अव्यवस्था से निपटने के लिए किसानों ने स्वयं व्यवस्था संभाली और श्रमदान किया। श्रमदान के कारण कर्मचारी हड़ताल: प्राथमिक कारण यह था कि धान खरीदी केंद्रों के कर्मचारी (जैसे लैंप्स कर्मचारी और कंप्यूटर ऑपरेटर) अपनी विभिन्न मांगों को लेकर हड़ताल पर थे, जिससे खरीदी प्रक्रिया पूरी तरह ठप हो गई थी।अव्यवस्था: सरकारी व्यवस्था ठप होने के कारण, केंद्रों पर धान बेचने आए किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था, जिससे लंबी कतारें लग गईं और काम रुका रहा।समय की कमी: किसान जल्द से जल्द अपना धान बेचना चाहते थे, क्योंकि खरीदी का समय सीमित होता है। किसानों द्वारा किए गए कार्य (श्रमदान)किसानों ने अपनी समस्याओं को हल करने और धान खरीदी प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए खुद ही कार्य करने में व्यस्त हो गए किए जिसको लेकर ग्राम पंचायत हरवेल सरपंच महेश नेताम ने बताया कि 15 नवम्बर से शुरू हुई धान खरीदी लेकिन लेमप्स के कर्मचारी और आपरेटर हड़ताल में चले जानेके कारण किसानों को मायुस होकर जाना पड़ रहा है और किसानों ने स्वयं श्रमदान किया और ऐसा ही गम्हरी, बासकोट में भी देखने को मिला है|

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