Saturday, February 14, 2026

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ग्राम तारगांव में हुआ कुंभकरण दशहरा पर्व

अनिंद लाल की रिपोर्ट

फरसगांव/माकड़ी –

कोंडागांव जिला के ग्राम पंचायत तारगांव में प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी कुंभकरण दशहरा पर्व बड़ी धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार तालाब से कुंभकरण की विशाल प्रतिमा को लाया गया, जिसे देखने के लिए हजारों की संख्या में दर्शक उमड़े।पर्व का मुख्य आकर्षण कुंभकरण की झांकी रही, जिसे बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ गांववासियों द्वारा सजाया गया था। जैसे ही कुंभकरण की झांकी गांव में प्रवेश करती है, पूरा वातावरण जयघोष और ढोल-नगाड़ों की गूंज से गूंज उठता है। तालाब से कुंभकरण को रावण दल के साथ भव्य झांकी के रूप में रामलीला मंच तक ले जाया जाता है। राम और कुंभकरण के बीच युद्ध का मंचन होता है। यह युद्ध दर्शकों के बीच अत्यंत रोमांच पैदा करता है। तारगांव का यह आयोजन आसपास के क्षेत्रों में भी प्रसिद्ध है और माना जाता है कि यह पर्व यहां सबसे भव्य रूप में मनाया जाता है। क्षेत्र के लोग पूरे परिवार सहित इस पर्व में भाग लेने आते हैं, जिससे गांव में मेले जैसा माहौल बना रहता है।यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि सामाजिक एकता, परंपरा और संस्कृति को जीवंत रखने का एक माध्यम भी है। कुंभकरण दशहरा समिति के अध्यक्ष नरेंद्र नेताम ने बताया कि “यह परंपरा वर्षों पुरानी है और यहाँ दशहरा केवल रावण वध तक सीमित नहीं है, बल्कि कुंभकरण को भी विशेष महत्व दिया जाता है। ग्रामीणों की आस्था और सहयोग से यह आयोजन हर वर्ष और भव्य रूप लेता जा रहा है।” यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को भी जीवंत रूप में प्रस्तुत करता है।

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ग्राम तारगांव में हुआ कुंभकरण दशहरा पर्व

अनिंद लाल की रिपोर्ट

फरसगांव/माकड़ी –

कोंडागांव जिला के ग्राम पंचायत तारगांव में प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी कुंभकरण दशहरा पर्व बड़ी धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार तालाब से कुंभकरण की विशाल प्रतिमा को लाया गया, जिसे देखने के लिए हजारों की संख्या में दर्शक उमड़े।पर्व का मुख्य आकर्षण कुंभकरण की झांकी रही, जिसे बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ गांववासियों द्वारा सजाया गया था। जैसे ही कुंभकरण की झांकी गांव में प्रवेश करती है, पूरा वातावरण जयघोष और ढोल-नगाड़ों की गूंज से गूंज उठता है। तालाब से कुंभकरण को रावण दल के साथ भव्य झांकी के रूप में रामलीला मंच तक ले जाया जाता है। राम और कुंभकरण के बीच युद्ध का मंचन होता है। यह युद्ध दर्शकों के बीच अत्यंत रोमांच पैदा करता है। तारगांव का यह आयोजन आसपास के क्षेत्रों में भी प्रसिद्ध है और माना जाता है कि यह पर्व यहां सबसे भव्य रूप में मनाया जाता है। क्षेत्र के लोग पूरे परिवार सहित इस पर्व में भाग लेने आते हैं, जिससे गांव में मेले जैसा माहौल बना रहता है।यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि सामाजिक एकता, परंपरा और संस्कृति को जीवंत रखने का एक माध्यम भी है। कुंभकरण दशहरा समिति के अध्यक्ष नरेंद्र नेताम ने बताया कि “यह परंपरा वर्षों पुरानी है और यहाँ दशहरा केवल रावण वध तक सीमित नहीं है, बल्कि कुंभकरण को भी विशेष महत्व दिया जाता है। ग्रामीणों की आस्था और सहयोग से यह आयोजन हर वर्ष और भव्य रूप लेता जा रहा है।” यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को भी जीवंत रूप में प्रस्तुत करता है।

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