Saturday, February 14, 2026

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मोबाइल लाइट की रोशनी में एक्सिडेंट मरीज का इलाज, फरसगांव अस्पताल में नहीं थी इमरजेंसी लाइट

कोंडागांव/फरसगांव –

कोंडागांव जिले के ब्लॉक मुख्यालय फरसगांव के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में गंभीर प्रशासनिक लापरवाही सामने आई है। बुधवार शाम लगभग 7:30 बजे अचानक बिजली आपूर्ति बाधित हो गई, बताया जा रहा है कि ट्रांसफॉर्मर में खराबी के चलते पूरे अस्पताल की लाइट चली गई।बिजली गुल होने के कुछ ही समय बाद बरकई गांव से एक सड़क दुर्घटना में घायल मरीज को इमरजेंसी में लाया गया, लेकिन अस्पताल में न तो इमरजेंसी लाइट थी, न जनरेटर चालू था।

डॉक्टर और नर्सों को मोबाइल फोन की टॉर्च की रोशनी में मरीज का प्राथमिक इलाज करना पड़ा।स्थानीय नागरिकों और अस्पताल कर्मचारियों के अनुसार, अस्पताल में लंबे समय से बैकअप व्यवस्था नहीं है, जिसकी शिकायतें कई बार की गई हैं, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। प्रश्न जो उठते हैं: क्या अस्पताल में जनरेटर या सोलर बैकअप की कोई व्यवस्था नहीं है? अगर है, तो वह कार्यशील क्यों नहीं थी?इस तरह की घटना में अगर मरीज की जान चली जाती, तो कौन जिम्मेदार होता?

स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन इस लापरवाही की जिम्मेदारी लेगा? घटना की जांच होनी चाहिए। जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही की जाए।अस्पताल में तत्काल इमरजेंसी लाइट/जनरेटर की व्यवस्था की जाए। ऐसी लापरवाही भविष्य में न हो, इसके लिए नियमित निगरानी की व्यवस्था बनाई जाए।

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कोंडागांव जिले के ब्लॉक मुख्यालय फरसगांव के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में गंभीर प्रशासनिक लापरवाही सामने आई है। बुधवार शाम लगभग 7:30 बजे अचानक बिजली आपूर्ति बाधित हो गई, बताया जा रहा है कि ट्रांसफॉर्मर में खराबी के चलते पूरे अस्पताल की लाइट चली गई।बिजली गुल होने के कुछ ही समय बाद बरकई गांव से एक सड़क दुर्घटना में घायल मरीज को इमरजेंसी में लाया गया, लेकिन अस्पताल में न तो इमरजेंसी लाइट थी, न जनरेटर चालू था।

डॉक्टर और नर्सों को मोबाइल फोन की टॉर्च की रोशनी में मरीज का प्राथमिक इलाज करना पड़ा।स्थानीय नागरिकों और अस्पताल कर्मचारियों के अनुसार, अस्पताल में लंबे समय से बैकअप व्यवस्था नहीं है, जिसकी शिकायतें कई बार की गई हैं, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। प्रश्न जो उठते हैं: क्या अस्पताल में जनरेटर या सोलर बैकअप की कोई व्यवस्था नहीं है? अगर है, तो वह कार्यशील क्यों नहीं थी?इस तरह की घटना में अगर मरीज की जान चली जाती, तो कौन जिम्मेदार होता?

स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन इस लापरवाही की जिम्मेदारी लेगा? घटना की जांच होनी चाहिए। जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही की जाए।अस्पताल में तत्काल इमरजेंसी लाइट/जनरेटर की व्यवस्था की जाए। ऐसी लापरवाही भविष्य में न हो, इसके लिए नियमित निगरानी की व्यवस्था बनाई जाए।

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